रोगशैय्या पर प्रेमचंद, अपनी अंतिम बीमारी के
वक्त। रामकटोरा वाले घर में यह तस्वीर 'अज्ञेय' ने सितम्बर 1936 में ली थी,
जब वे उपन्यास-सम्राट की मिजाज-पुरसी के लिए बनारस गए। अगले महीने
प्रेमचंद का परलोकगमन हो गया था। आपको पता है, अज्ञेय की पहली
कहानी 'अमर-वल्लरी' प्रेमचंद ने ही प्रकाशित की थी, 'जागरण' में 5
अक्तूबर, 1932 को। अज्ञेय तब, अन्य क्रांतिकारियों के साथ, दिल्ली षड्यंत्र
मुकदमे में जेल काट रहे थे, जहाँ से तीन साल बाद छूटे।Sunday, 12 January 2014
रोगशैय्या पर प्रेमचंद
रोगशैय्या पर प्रेमचंद, अपनी अंतिम बीमारी के
वक्त। रामकटोरा वाले घर में यह तस्वीर 'अज्ञेय' ने सितम्बर 1936 में ली थी,
जब वे उपन्यास-सम्राट की मिजाज-पुरसी के लिए बनारस गए। अगले महीने
प्रेमचंद का परलोकगमन हो गया था। आपको पता है, अज्ञेय की पहली
कहानी 'अमर-वल्लरी' प्रेमचंद ने ही प्रकाशित की थी, 'जागरण' में 5
अक्तूबर, 1932 को। अज्ञेय तब, अन्य क्रांतिकारियों के साथ, दिल्ली षड्यंत्र
मुकदमे में जेल काट रहे थे, जहाँ से तीन साल बाद छूटे।
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