ये लड़कियां गरीब हैं, इनका डांस कोई नामी
कोरियोग्राफर निर्देशित नहीं करता, इसलिए डांस का लय ताल से कोई समबन्ध
नहीं होता, अदाओं पर ज्यादा ज़ोर दिया जाता है,, इनके शो की टिकट 20-25
रूपये होती है और मेहनताना बमुश्किल प्रति शो या प्रतिदिन 300 से 400
रुपये, ये गाओं कस्बों के मेले ठेले में नाचते हैं, इनका शो गरीब किसान,
बेरोजगार युवा, मेले मैं तैनात कॉन्स्टेबल( मुफ्त में) देखते हैं,, सिर्फ
इसीलिये इसे अश्लील डांस कहा जाता है,,! लेकिन जहाँ परिस्थितियां इसके
बिपरीत होती है, उसे महोत्सव कहा जाता है बड़ा महोत्सव, या श्रद्धांजलि
समारोह। कपडे उतने ही लेकिन महंगे, धुले और चमकदार, अदायें वही बस तराशी
हुई और तालबद्ध, कुलीन दिखने वाली गोरी चिट्टी, तंदुरुस्त, नामी रोलमॉडल
महिलायें, शो का बजट 300 करोड़, यहाँ बाप- बेटा, मंत्री, नेता, आई जी, सब
मिल जुलकर डांस का आनंद लेते हैं हैं,, २००० पुलिस सुरक्षा मैं तैनात,,
मजाल जो कोई मनचला अश्लील कमेंट या इशारा कर दे,, थिंक अगेन चचा केजरीवाल
हमें आदमी आम नहीं चरित्रवान और न्यायप्रिय चाहिए सब सुधर जायेगा,, !Sunday, 12 January 2014
थिंक अगेन
ये लड़कियां गरीब हैं, इनका डांस कोई नामी
कोरियोग्राफर निर्देशित नहीं करता, इसलिए डांस का लय ताल से कोई समबन्ध
नहीं होता, अदाओं पर ज्यादा ज़ोर दिया जाता है,, इनके शो की टिकट 20-25
रूपये होती है और मेहनताना बमुश्किल प्रति शो या प्रतिदिन 300 से 400
रुपये, ये गाओं कस्बों के मेले ठेले में नाचते हैं, इनका शो गरीब किसान,
बेरोजगार युवा, मेले मैं तैनात कॉन्स्टेबल( मुफ्त में) देखते हैं,, सिर्फ
इसीलिये इसे अश्लील डांस कहा जाता है,,! लेकिन जहाँ परिस्थितियां इसके
बिपरीत होती है, उसे महोत्सव कहा जाता है बड़ा महोत्सव, या श्रद्धांजलि
समारोह। कपडे उतने ही लेकिन महंगे, धुले और चमकदार, अदायें वही बस तराशी
हुई और तालबद्ध, कुलीन दिखने वाली गोरी चिट्टी, तंदुरुस्त, नामी रोलमॉडल
महिलायें, शो का बजट 300 करोड़, यहाँ बाप- बेटा, मंत्री, नेता, आई जी, सब
मिल जुलकर डांस का आनंद लेते हैं हैं,, २००० पुलिस सुरक्षा मैं तैनात,,
मजाल जो कोई मनचला अश्लील कमेंट या इशारा कर दे,, थिंक अगेन चचा केजरीवाल
हमें आदमी आम नहीं चरित्रवान और न्यायप्रिय चाहिए सब सुधर जायेगा,, !
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