हर
"चौबेपुर" और "बलिहार" के बीच मैं एक नदी होती है.. उम्मीद की एक नाव
होती है लेकिन उसमें आशंका का छोटा सा छेद भी होता है, छेद से रिसकर पानी
अन्दर आता है और गुंजा के पाँव के महावर से चन्दन के पाँव भी रंग देता है..
लाल रंग पलभर के लिए सम्बन्ध बना देता है
विदाई के दुःख को कुछ देर के लिए मिलन के रंग में रंग देता है.. चन्दन को
शरमाते हुए देखकर गुंजा कहती है.. एक दिन तो रंगना ही है फिर लजाते क्यू
हो.? अभिव्यक्ति के अनगिनत सटीक तरीके हैं सीखने के लिए.. फिल्म आज भी सुपर
हिट है "नदिया के पार".Sunday, 12 January 2014
हर "चौबेपुर" और "बलिहार" के बीच मैं एक नदी होती है
हर
"चौबेपुर" और "बलिहार" के बीच मैं एक नदी होती है.. उम्मीद की एक नाव
होती है लेकिन उसमें आशंका का छोटा सा छेद भी होता है, छेद से रिसकर पानी
अन्दर आता है और गुंजा के पाँव के महावर से चन्दन के पाँव भी रंग देता है..
लाल रंग पलभर के लिए सम्बन्ध बना देता है
विदाई के दुःख को कुछ देर के लिए मिलन के रंग में रंग देता है.. चन्दन को
शरमाते हुए देखकर गुंजा कहती है.. एक दिन तो रंगना ही है फिर लजाते क्यू
हो.? अभिव्यक्ति के अनगिनत सटीक तरीके हैं सीखने के लिए.. फिल्म आज भी सुपर
हिट है "नदिया के पार".
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Nice movie
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