Sunday, 12 January 2014

पत्रकारिता शायद जीवित रहे

सुना है पत्रकार आशुतोष "आप" ज्वाइन करने वाले हैं,, क्यू भाई क्या कमी रह गयी थी दर्शकों के लाड़ प्यार में, जब कई सौ पत्रकारों को आपके संपादक रहते हुए चेन्नल ने बहार निकाल दिया गया था,, तब आपका ये कथित आम आदमी क्यू नहीं जागा, पूंजीपतियों के समर्थन में आप खड़े रहे और पत्रकारों के घर के बर्तन भाड़े बिकते रहे,, कोई मकान का किराया नहीं दे पाया, कोई बच्चे कि फीस न भर पाया,, तब आप सड़क पर क्यू न आये, आपने विरोध में इस्तीफ़ा क्यू नहीं दिया,,? केजरीवाल के सी.एम् बनते ही जमीर क्यू जाग गया,,, राहुल कँवल को भी यही नसीहत है, वापस ऑफिस जाओ, फाउंडेशन पोतो, सूट पहनो और अपना काम करो, इससे पत्रकारिता शायद जीवित रहे और आम आदमी का आम आदमी पर भरोसा भी,,,!

No comments:

Post a Comment

जनसंपर्क अधिकारियों अब ईमेल छोड़ो, मुनादी करो।

इस हफ्ते 4,000 से अधिक भारतीय पत्रकार और जनसंपर्क अधिकारी मुनादी में रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं । तो आप किस बात का इंतज़ार कर रहे हैं ?  बाउंस...